नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में तीन नव नियुक्त न्यायाधीशों शैल जैन, मधु जैन और विनोद कुमार ने गुरुवार को औपचारिक रूप से शपथ ग्रहण की. इसके साथ ही अदालत में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है, जबकि स्वीकृत कुल पद 60 हैं.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने तीनों न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. यह नियुक्तियां केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद की गईं थीं. शपथ ग्रहण समारोह में दिल्ली हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश, नव नियुक्त न्यायाधीशों के परिजन, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य और अन्य प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञ उपस्थित रहे.
एजेंसी एएनआई के मुताबिक इन नियुक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी की गई थी. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से इन नियुक्तियों की जानकारी दी और बताया कि ये नियुक्तियां भारतीय संविधान के तहत, भारत के मुख्य न्यायाधीश की परामर्श से की गई हैं.
इन नियुक्तियों से दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था पर बना दबाव कम होने की उम्मीद है, जो लंबे समय से न्यायाधीशों की कमी और मामलों की बढ़ती संख्या से जूझ रही है.
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 1 जुलाई 2025 को हुई बैठक में शैल जैन और मधु जैन की नियुक्तियों को मंजूरी दी थी. वहीं विनोद कुमार की नियुक्ति को 2 जुलाई की बैठक में मंजूरी मिली, जिसमें उनके न्यायिक रिकॉर्ड और कार्यकाल की विस्तृत समीक्षा की गई.
पहले 6 जजों ने ली थी शपथ
इससे पहले एक अन्य समारोह में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने छह नव स्थानांतरित न्यायाधीशों को भी शपथ दिलाई थी. ये न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव, नितिन वासुदेव सांब्रे, विवेक चौधरी, अनिल क्षेत्रपाल, अरुण कुमार मोंगा और ओम प्रकाश शुक्ला देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से स्थानांतरित होकर दिल्ली हाई कोर्ट आए हैं। ये स्थानांतरण सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 26 मई की बैठक की सिफारिशों पर आधारित थे.
इन नियुक्तियों और स्थानांतरणों से न्यायिक प्रक्रिया की दक्षता बढ़ने और मामलों के निपटारे की गति में सुधार की उम्मीद है, जिससे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे वादकारियों को राहत मिल सकती है.






